रेशम कोसा धागे का उत्पादन बढ़ाने पर मंथन, सचिव राजेश राणा ने किया महिला समूहों और व्यापारियों से चर्चा


रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्थित रेशम सेतु ग्रामोद्योग विभाग के द्वारा बैठक आयोजित की गई बैठक में छत्तीसगढ़ शासन के ग्रामोद्योग विभाग के सचिव राजेश सिंह राणा जी (IAS), CS नॉनहरें जी ज्वाइन डायरेक्टर एवं ठाकुर राम जी डिप्टी डायरेक्टर छत्तीसगढ़ के सभी महिला समूह धागाहरण एवं व्यापारिक उपस्थित रहे । कोसा धागे के उत्पादन को बढ़ावा देने रेशम उद्योग को और अधिक सशक्त बनाने के संबंध में प्रतिभागियों से चर्चा किया गया, इस दौरान महिला धागाकरण समूहों की भूमिका, कोसा धागा उत्पादन में वृद्धि तथा व्यापारियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से महिला समूह एवं व्यापारियों शामिल हुए महासमुंद, धमतरी, जांजगीर-चांपा एवं रायगढ़ जिलों के महिला धागाकरण समूहों तथा कोसा धागा क्रेता-व्यापारियों के साथ महत्वपूर्ण चर्चा आयोजित की गई।

बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में रेशम एवं कोसा धागा उत्पादन को प्रोत्साहित करना, महिला समूहों के कार्यों को बढ़ावा देना और रेशम आधारित आजीविका के अवसरों को मजबूत करना रहा। इस पहल से महिला धागाकरण समूहों को प्रोत्साहन मिलने के साथ ही कोसा धागा उत्पादन एवं विपणन व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में सकारात्मक संभावनाएं हैं। छत्तीसगढ़ में रेशम उद्योग को नई गति देने तथा इससे जुड़े लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए इस तरह की चर्चाएं महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।



छत्तीसगढ़ में रेशम धागा उत्पादकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने, महिला धागाकरण समूहों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने तथा कोसा धागे के व्यवस्थित विपणन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रायपुर में स्थापित छत्तीसगढ़ रेशम सेतु (सिल्क एक्सचेंज) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसी कड़ी में ग्रामोद्योग विभाग के सचिव श्री राजेश सिंह राणा ने महासमुंद, धमतरी, जांजगीर-चांपा एवं रायगढ़ सहित विभिन्न जिलों के महिला धागाकरण समूहों तथा कोसा धागा व्यापारियों के साथ चर्चा कर उनकी समस्याओं, आवश्यकताओं और सुझावों की जानकारी ली।

बैठक में महिला धागाकरण समूहों ने कोसा की बढ़ती कीमतों तथा उसके अनुपात में रेशम धागे के विक्रय मूल्य में पर्याप्त वृद्धि नहीं होने से उत्पन्न आर्थिक कठिनाइयों को प्रमुखता से उठाया। नारी शक्ति चम्पा की महिला समूह बबीता बरेठ एवं खल्लारी धागाकरण समूह महिलाओं ने बताया कि कच्चे माल की लागत बढ़ने के बावजूद तैयार धागे का उचित मूल्य नहीं मिलने से उनके काम और आमदनी पर असर पड़ रहा है। उन्होंने कोसा की दरों एवं धागे के विक्रय मूल्य में संतुलन स्थापित करने की मांग रखी, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं इस कार्य से जुड़कर स्वरोजगार प्राप्त कर सकें।



घरेलू रोजगार से महिलाएं कमा रहीं 8 से 12 हजार रुपये प्रतिमाह

सचिव राणा ने महिला समूहों से उनके कार्य और मासिक आय के संबंध में जानकारी ली। महिलाओं ने बताया कि धागाकरण कार्य में उनकी मेहनत और उत्पादन के अनुसार आमदनी प्राप्त होती है। वर्तमान में कई महिलाएं प्रतिमाह 8,000  से 12,000 रुपये तक की मासिक आमदनी प्राप्त कर रही हैं,  रेशम धागाकरण ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। महिलाओं की समस्याओं पर चर्चा करते हुए सचिव राजेश सिंह राणा ने कोसा की दरों तथा रेशम धागे के विक्रय मूल्य से संबंधित कठिनाइयों के समाधान के लिए आवश्यक पहल करने का आश्वासन दिया। उन्होंने महिला समूहों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस क्षेत्र में बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

रेशम सेतु से उत्पादकों और व्यापारियों को मिलेगा सीधा लाभ

रायगढ़ के व्यापारी, राजकुमार देवांगन, मनीराम, चांपा के. सभाशंकर पांडे, संतोष देवांगन एवं सक्ती के हेमंत देवांगन सहित अन्य व्यापारी उपस्थित रहे।

रायपुर में स्थापित रेशम सेतु का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में महिला धागाकरण समूहों द्वारा उत्पादित रेशम धागे की बिक्री के लिए एक व्यवस्थित केंद्रीय व्यवस्था विकसित करना है। इसके माध्यम से विभिन्न जिलों के उत्पादक समूह अपना तैयार धागा निर्धारित दर पर बिक्री के लिए उपलब्ध करा सकेंगे और व्यापारी अपनी आवश्यकता के अनुसार धागे की खरीद कर सकेंगे। धागा उत्पादकों और व्यापारियों के बीच सीधा संपर्क स्थापित होगा। व्यापारियों को अपनी जरूरत के अनुरूप गुणवत्तायुक्त धागा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेगा। इससे दूसरे शहरों तक जाने, परिवहन और आवागमन पर होने वाले खर्च तथा समय की बचत होने की उम्मीद है।

बैठक में शामिल व्यापारियों ने रेशम सेतु की स्थापना पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि पहले उन्हें टसर कोसा धागे की खरीद के लिए जगदलपुर तक जाना पड़ता था। अब रायपुर में ही धागा उपलब्ध होने से उनकी खरीद प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक होगी। व्यापारियों ने अपनी आवश्यकताओं और पसंद के अनुरूप विभिन्न प्रकार के रेशम धागे की मांग भी रखी। इस पर महिला समूहों ने मांग के अनुसार गुणवत्तायुक्त धागा उपलब्ध कराने की सहमति जताई।

अलग-अलग जिलों के सिल्क ब्रांड का किया अवलोकन

रेशम सेतु में महिला समूहों द्वारा तैयार धागे को अलग-अलग ब्रांड नामों से प्रदर्शित किया गया है। इससे प्रत्येक समूह के उत्पाद की अपनी पहचान विकसित करने और गुणवत्ता के आधार पर उचित मूल्य निर्धारित करने में मदद मिलेगी। व्यापारियों ने रायगढ़ के फॉरेस्ट गोल्ड सिल्क, सरगुजा के महामाया सिल्क, जशपुर के मघेश्वर सिल्क, नारायणपुर के माड़ सिल्क, सारंगढ़ के समलेश्वरी सिल्क, महासमुंद के खल्लारी सिल्क, जांजगीर-चांपा के चांपा सिल्क, कोंडागांव के मां तेलीनसती सिल्क, जगदलपुर के दंतेश्वरी सिल्क तथा कोरबा के सृष्टि सिल्क एवं कांकेर के अरण्य सिल्क सहित विभिन्न ब्रांडों के धागों का अवलोकन किया।

ऑनलाइन पोर्टल बनाने के निर्देश

रेशम धागाकरण समूहों और व्यापारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा खरीद-बिक्री की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए ग्रामोद्योग सचिव श्री राजेश सिंह राणा ने विभागीय अधिकारियों को ऑनलाइन पोर्टल तैयार कराने के निर्देश दिए। पोर्टल के माध्यम से धागाकरण समूहों और व्यापारियों को आवश्यक जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराने की सुविधा विकसित करने पर जोर दिया गया।



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