आस्था और परंपरा का प्रतीक बना वट सावित्री पति की लम्बी आयु एवं परिवार की सुख-समृद्धि के लिए सुहागिन नें रखा व्रत



Ashkumar Sahu


बलौदाबाजार - आज पूरे देशभर में सुहागिन महिलाओं द्वारा वट सावित्री व्रत बड़े श्रद्धा, उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया।  महिलाओं ने बरगद (वट) वृक्ष के नीचे एकत्र होकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और अपने पति की लंबी आयु की कामना कर परिवार की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की व्रत रखा।

सुबह से ही पूजा स्थलों पर महिलाओं की भीड़ देखने को मिली। पारंपरिक साड़ी और श्रृंगार में सजी महिलाओं ने वट वृक्ष के चारों ओर पवित्र धागा बांधकर व्रत कथा सुनी तथा पूजा संपन्न की। पूरे वातावरण में भक्ति, श्रद्धा और भारतीय संस्कृति की सुंदर झलक दिखाई दी।

ग्रामीण क्षेत्रों में यह पर्व विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि माता सावित्री ने अपने तप, प्रेम और दृढ़ संकल्प से अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस प्राप्त किए थे। तभी से यह व्रत अखंड सौभाग्य और दांपत्य सुख का प्रतीक माना जाता है।

पूजा के दौरान महिलाओं ने परिवार की सुख-शांति, अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना की। कई स्थानों पर सामूहिक पूजा का आयोजन भी किया गया, जहां महिलाओं ने एक-दूसरे को व्रत की शुभकामनाएं दीं।

आज के बदलते समय में भी वट सावित्री व्रत भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और परंपराओं को जीवित रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बना हुआ है। महिलाओं की आस्था और समर्पण ने इस पर्व को और भी भव्य एवं प्रेरणादायक बना दिया।

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