आदिवासी किसान की जमीन पर राखड़ का कहर, पंचमुखी स्टोन क्रेशर पर गंभीर आरोप

ग्रामीणों ने पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन एवं झूठे आरोप लगाने का लगाया आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग 

रिपोर्टर – अश कुमार साहू 





बिटकुली - नवापारा। ग्राम बिटकुली, नवापारा एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित पंचमुखी स्टोन क्रेशर को लेकर ग्रामीणों और किसानों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि क्रेशर संचालक द्वारा लगातार पर्यावरण विभाग के नियमों एवं निर्धारित शर्तों की अनदेखी की जा रही है, जिसके कारण क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ रहा है और किसानों की जमीन प्रभावित हो रही है।




ग्रामीणों के अनुसार स्टोन क्रेशर के संचालन के दौरान निकलने वाली अत्यधिक धूल हवा के माध्यम से करीब डेढ़ किलोमीटर तक फैल रही है। इससे ग्रामीणों के स्वास्थ्य, खेतों की फसलों तथा आसपास के वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद प्रदूषण रोकने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई।



बताया जा रहा है कि जिस स्थान पर क्रेशर संचालित हो रहा है, उसके नीचे क्षेत्र का महत्वपूर्ण बांध स्थित है, जिससे बिटकुली, नवापारा सहित आसपास के गांवों के किसानों को सिंचाई एवं निस्तारी के लिए पानी मिलता है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि धूल एवं राखड़ के कारण जल स्रोत भी प्रभावित हो सकता है।


मामला तब और गंभीर हो गया जब कथित रूप से क्रेशर संचालक द्वारा एक आदिवासी किसान की कृषि भूमि के पास फ्लाई ऐश (राखड़) डंप कर दी गई। बारिश के दौरान राखड़ बहकर किसान के खेत में पहुंच गई, जिससे उसकी कृषि भूमि लगभग एक से डेढ़ फीट तक पट गई और खेती योग्य नहीं रही। किसान द्वारा अपनी जमीन को पुनः उपयोग योग्य बनाने एवं नुकसान की भरपाई की मांग की गई, लेकिन अब तक उसे न्याय नहीं मिल पाया है।


ग्रामीणों का आरोप है कि अब क्रेशर संचालक उक्त जमीन पर अपना दावा कर रहा है, जबकि किसान के पास भूमि संबंधी दस्तावेज मौजूद हैं। ग्रामीणों ने आदिवासी भूमि से जुड़े मामले की राजस्व विभाग से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।


इधर खदान संचालक द्वारा ग्रामीणों पर भी गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। संचालक का कहना है कि गांव के कुछ लोग रात में शराब पीकर उनकी गाड़ियों को रोकते हैं, गाड़ियों में रखे बिल्टी एवं चालान की प्रतियां फाड़ देते हैं तथा पैसों की मांग करते हैं। हालांकि ग्रामीणों ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।


ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पंचमुखी स्टोन क्रेशर की पर्यावरणीय स्वीकृति एवं नियमों के पालन की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए, धूल प्रदूषण रोकने के लिए तत्काल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा प्रभावित किसान को उचित मुआवजा दिलाया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।




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