जल-जमीन की लड़ाई में किसानों के साथ उतरा भूपेश बघेल, किसान महासम्मेलन में धहाड़ा पूर्व मुख्यमंत्री
ऐशकुमार साहू
रायपुर - तिल्दा नेवरा ब्लाक के ग्राम अलदा में प्रस्तावित स्पंज आयरन उद्योग के विरोध में पिछले डेढ़ वर्षों से चल रहे किसान आंदोलन ने रविवार को उस समय और बड़ा स्वरूप ले लिया, जब प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल विशाल किसान महासम्मेलन में शामिल होने पहुंचे। सम्मेलन में हजारों की संख्या में किसान, ग्रामीण, युवा और महिलाएं मौजूद रहे। सभा स्थल किसानों के नारों और जल-जमीन बचाने के संकल्प से गूंज उठा।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव की जानकारी और सहमति के बिना सरपंच, सचिव एवं कुछ पंचों की मिलीभगत से फर्जी ग्रामसभा आयोजित कर उद्योग स्थापना के लिए एनओसी जारी की गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि जब उद्योग स्थापना की प्रक्रिया शुरू हुई तब उन्हें इस पूरे मामले की जानकारी मिली, जिसके बाद गांव में लगातार विरोध प्रदर्शन और बहिष्कार का आंदोलन जारी है।
कार्यक्रम में भाटापारा विधायक इंद्र साव भी उपस्थित रहे और उन्होंने ने हर कदम पर किसानों का साथ देने का आश्वासन किया
सभा को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि प्रशासनिक जांच में ग्रामसभा के फर्जी होने की पुष्टि हो चुकी है। तीन अलग-अलग अधिकारियों की जांच में भी यह सामने आया है कि ग्रामसभा की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। इसके बावजूद आज तक किसी भी दोषी अधिकारी या जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े करता है।
भूपेश बघेल ने कहा कि यदि ग्रामसभा फर्जी थी तो सबसे पहले उन लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए जिन्होंने गांव की सहमति के बिना एनओसी जारी की। उन्होंने मांग की कि सरपंच, सचिव और इस प्रक्रिया में शामिल सभी जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने पर्यावरण विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब ग्रामसभा की वैधता ही संदिग्ध थी तो पर्यावरणीय स्वीकृति किस आधार पर दी गई। यदि अधिकारियों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उद्योग को अनुमति दी है तो उन अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
सभा में कुम्हारी जलाशय का मुद्दा प्रमुख रूप से छाया रहा। भूपेश बघेल ने कहा कि समोदा बांध से जुड़े कुम्हारी जलाशय का पानी लगभग 20 से 25 गांवों के किसानों और ग्रामीणों के जीवन का आधार है। इसी पानी से खेती, पशुपालन और दैनिक जरूरतें पूरी होती हैं। ऐसे में यदि इस पानी को किसी उद्योग को सौंपने की कोशिश की जाती है तो इसका सीधा असर हजारों किसानों की आजीविका पर पड़ेगा।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसानों के हिस्से का पानी किसी उद्योग को देने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी और कांग्रेस पार्टी किसानों के साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने कहा कि जल, जमीन और किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष किया जाएगा।
पूर्व मुख्यमंत्री ने पुलिस और प्रशासन पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि आंदोलन को कमजोर करने के लिए किसानों को प्रताड़ित किया गया और कुछ किसानों के खिलाफ फर्जी मामले दर्ज किए गए। उन्होंने विशेष रूप से किसान रामखिलावन वर्मा और दुर्गेश वर्मा का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें आदतन अपराधी की श्रेणी में रखकर थाने में उनके फोटो तक लगाए गए थे। किसान महासम्मेलन से पहले इन नामों को हटाया जाना यह दर्शाता है कि कार्रवाई गलत आधार पर की गई थी।
भूपेश बघेल ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले किसानों को अपराधी साबित करने की कोशिश दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
इस विशाल किसान महासम्मेलन में छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम के पूर्व अध्यक्ष सैलेश नितिन त्रिवेदी, पूर्व विधायक जनकराम वर्मा, धरसीवा की पूर्व विधायक अनीता शर्मा सहित कांग्रेस के अनेक वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। सम्मेलन में हजारों ग्रामीणों की उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि क्षेत्र के लोग उद्योग स्थापना के मुद्दे पर एकजुट हैं और अपनी जमीन, पानी तथा किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।
महासम्मेलन के अंत में किसानों और ग्रामीणों ने संकल्प लिया कि जब तक उनकी मांगों पर न्यायसंगत कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। साथ ही यह चेतावनी भी दी गई कि किसानों के हितों और कुम्हारी जलाशय के अस्तित्व से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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