राज्य को आबंटित लक्ष्य को वापस लेने पर संसदीय सचिव ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना


पीएम आवासों के लक्ष्य को वापस लेने के कदम को बताया सौतेला व्यवहार 


महासमुंद। संसदीय सचिव व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2021-22 के लिए आवंटित ग्रामीण क्षेत्रों में 7,81,999 आवासों के लक्ष्य को वापस लेने के कदम को कांग्रेस शासित छत्तीसगढ़ के साथ सौतेला व्यवहार करार दिया है। 

गौरतलब है कि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इस वर्ष 17 नवंबर को छत्तीसगढ़ को लिखे एक पत्र में कहा है कि राज्य को वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए आवंटित ग्रामीण क्षेत्रों में 7,81,999 घरों के लक्ष्य को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया गया है। इधर संसदीय सचिव व विधायक श्री चंद्राकर ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के तहत राज्य को आवंटित लक्ष्य को वापस लेने पर केंद्र सरकार पर निशाना साधते कहा कि केंद्र सरकार राज्य के लंबित धन को जारी नहीं कर रही है और योजना के लक्ष्य को पूरा नहीं करने का आरोप राज्य सरकार पर ही लगा रही है। केंद्र सरकार ने केंद्रीय उत्पाद शुल्क का जो हिस्सा है उसे अभी तक नहीं दिया है। जीएसटी में भी लगातार कटौती कर रहे हैं। यह राशि लगभग 21-22 हजार करोड़ रूपये होती है। साथ ही कोयला में जो पेनाल्टी लगा है, रायल्टी की वह राशि 4,140 करोड़ रुपये है, यह राशि भी छत्तीसगढ़ सरकार को नहीं दे रही है। एक तरफ केंद्र सरकार राशि नहीं दे रही है, दूसरी तरफ आरोप लगाती है कि प्रदेश सरकार द्वारा योजनाओं के लक्ष्य को पूरा नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना एवं अन्य फंड के आवंटन में छत्तीसगढ़ के साथ छल पूर्ण व्यवहार कर रही है। भाजपा के नेता, मोदी सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन में नाकामी और भेदभाव पर पर्दा डालने के लिए राज्य सरकार पर झूठे तथा मनगढ़त आरोप लगा रहे हैं। मोदी सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना के आवंटन में भी अन्य केंद्रीय योजना की तरह ही छत्तीसगढ़ के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। इसी तरह उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य योजनाओं विशेषकर आयुष्मान योजना की राशि के भुगतान में भी सौतेला व्यवहार अपनाया जा रहा है। केंद्र सरकार की इस संवेदनहीन कृत्य की वजह से छत्तीसगढ़ के मरीजों के इलाज में परेशानियां आ रही है। स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत अंशदान राज्य शासन का और केंद्र दोनों से आता है। राज्य का अंश केंद्र को भेजा जा चुका है, लेकिन केंद्रांश की राशि नहीं आने के कारण भुगतान नहीं हो पा रहा है। जन हितैषी होने का ढिंढोरा पीटने वाले भाजपा के नेता चुप्पी साधे हुए हैं और उन्हें जनता को होने वाली परेशानियों से कोई सरोकार नहीं है।

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