पैरा दान महादान का ग्रामीणों में व्यापक असर 25 गांव सें ही 1173 ट्रैक्टर संग्रहण
छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपर को बचाने में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अहम भूमिका निभाई है।
छत्तीसगढ़ के पौने तीन करोड़ लोगों की चिंता करने वाले प्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने न सि गांव, गरीब, किसान, मजदूर, युवा हितों के लिए जनकल्याणकारी योजनाएं बनाई है, बल्कि गौ माता की संरक्ष व संवर्धन की भी चिंता उन्होंने की है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गौ माता पर राजनीति करने की बजाए स भागने में गौ माताओं को सम्मान देते हुए गोठानों में चारा पानी के लिए छत्तीसगढ़ के उदारवादी किसानों से पै दान की अपील की थी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के इस अपील को जन मानस तक पहुंचाने के लिए पैरा दान म दान रथ का प्रतिशाद महारामुद ब्लाक में देखने को मिला है।
पैरा दान महादान अभियान को साकार करने लिए छत्तीसगढ़ में सभी किसानों पैरा दान करने लोगों तक पहुंचाने के लिए 28 नवंबर 2022 से लेकर 18 जनवरी 2023 तक महासमुंद ब्लाक के प्रत्येक गांव का अम किया। प्रतिदिन 8 से 10 गांव का भ्रमण करते हुए ब्लाक के सिर्फ 75 गांव से ही फरवरी माह तक 1173 देव से 4 हजार 692 टन पैरा संग्रहण कर गोठानों में पहुंचाया गया है। जबकि 2022 का सरकारी आंकड़े ले तो पूरे साल में महासमुंद ब्लाक के 105 गोठानों के लिए 138 गांव के 2561 किसानों से 1550 टन ही पैरा दान में दि पाया है, जो गोठानों में पहुंचाया गया था। लेकिन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी के अपील और सरकार के प्रति अ विश्वास के साथ ही उनके दिशा निर्देश पर गांव में जन जागरुकता रथ भ्रमण से किसानों ने गौ माता के अपनी संवेदना दिखाई है और खुले मन से पैरा दान दिया है। कहीं न कहीं छत्तीसगढ़ के माटी पुत्र मुख्य भूपेश बघेल जी का लोकहित ही नहीं उनके पशु प्रेम को लेकर उनकी संवेदनशीलता को भी दर्शाता है।


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