संगठित शक्ति के बिना सामर्थ्यशाली समाज की कल्पना नहीं की जा सकती - राकेश


महासमुंद।
दैवी प्रवृत्ति द्वारा दानवी प्रवृत्ति पर विजय का पर्व विजयादशमी धर्म की अधर्म पर, नीति की अनीति पर, न्याय की अन्याय पर विजय का पर्व है इसी दिन श्री रामचन्द्र ने उन्मत्त रावण का वध  कर सृष्टि को आतातायियों से मुक्त किया था। विजयादशमी शक्ति पूजा का दिवस है। संसार शक्ति की भाषा समझता है। समाज की संगठित शक्ति के बिना सामर्थ्यशाली समाज की कल्पना नहीं की Iजा सकती। राष्ट्र की रक्षा के लिए शास्त्र जरूरी है और शास्त्र की रक्षा के लिए शस्त्र जरूरी है। उक्त उद्गार थे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आयोजित बावनकेरा में विजयादशमी पर्व के अवसर पर मुख्य वक्ता राकेश ने किया ।

भगवान राम ने वनवासी गिरिवासी समाज को संगठित किया। दुर्बल समाज की कोई नहीं सुनता है वह पतित एवं पराभूत होता है। इसलिए जागृत एवं सबल समाज की स्थापना हम सभी का कर्तव्य है। विजयादशमी के दिन ही 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना समाज में नवचैतन्य, आत्मविश्वास एवं विजय की आकांक्षा के निर्माण के लिए हुआ था, जो आज सम्पूर्ण राष्ट्र में समाज को संस्कारित कर शक्ति संपन्न, सामर्थ्यवान  व सज्जन शक्ति के विस्तार में लगा हुआ है।" कार्यक्रम का प्रारंभ भारत माता की छाया चित्र पर दीप प्रज्वलन व शस्त्र पूजन के पश्चात् अमृत वचन, सुभाषित वह एकल गीत के साथ हुआ। 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि समाजसेवी धरम साहू ने कहा कि भारत का इतिहास संघर्षों का इतिहास रहा है। आसुरी शक्ति हमेशा से ही समाज को तोड़ने में लगे हैं। भगवान श्रीराम, श्री कृष्ण, चन्द्रगुप्त, शिवाजी, पृथ्वीराज चौहान, महाराणा प्रताप जैसे महारथियों के व्यक्तित्व व कृतित्व से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए। आज हमारे सामने बहुत सारी चुनौतियां हैं। विघ्नसंतोषी लोग समाज में भ्रम निर्माण का कार्य में लगे हैं, वे देश को अशांत करना चाहते हैं। किसान आंदोलन, भारत-चीन समस्या, माओवादी, शहरी नक्सलवाद, धर्मांतरण, अस्पृश्यता जैसे कई समस्याएं हैं जिस पर हमको काम करने की जरूरत है। हमें अपने समाज को संगठित और जागृत करना होगा।

इस अवसर नारायण , निरंजन पटेल, धनेश सिन्हा, धरम पटेल, शम्मी सलूजा, हनी सिंह, रूद्रकुमार, ओमनारायण, लिलेश हरदेव, राधेश्याम, चन्दन, उमेश, पारसनाथ, भूपेन्द्र, श्रीराम लोधी, मनोज देवांगन, रामाधार चन्द्राकर, जगत सिन्हा, घनश्याम यादव, मोरध्वज, अनगेश्वर, चिन्तामणी दीवान, अमृत लोधी, हुलास सिन्हा, शैलेन्द्र सेवरकर, नेतराम, रूपेश सिन्हा, हेमन्त कन्नौजे, गोपाल दीवान, मोहन धीवर सहित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बंधु व ग्रामीण जन बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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