वर्तमान वित्तीय वर्ष में चौथी बार " रेपो रेट " में बढ़ोतरी आम जनमानस को झटका
महासमुंद। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा वर्तमान वित्तीय वर्ष में चौथी बार रेपो रेट बढ़ाना केंद्र सरकार का जनमानस के हितों के प्रति कुठाराघात कदम है l विगत 6 महीनों के भीतर चौथी बार रेपो रेट बढ़ाने से यह स्पष्ट हो चुका है कि मोदी सरकार महंगाई पर अंकुश लगाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है उक्त बातें प्रेस विज्ञप्ति में जिला कांग्रेस अध्यक्ष डॉ श्रीमती रश्मि चंद्राकर ने कही।
डा श्रीमति चंद्राकर ने कहाँ की वर्तमान वर्ष में ,4 मई ,5 अगस्त ,और अब पिछले 30 सितंबर को रेपो रेट बढ़ने का सीधा असर आम जनता के हितों पर पड़ना निश्चित है l होम लोन ,ऑटो लोन , और पर्सनल लोन सहित सभी तरह के लोन के ब्याज और प्रतिमाह की किश्ते बढ़ जाएंगे l केंद्र की मोदी सरकार की गलत आर्थिक नीतियों की वजह से मंहगाई बेरोजगारी व आय की कमी की मार झेल रही जनमानस पर एक और अत्याचार है।
डा श्रीमति चंद्राकर ने आगे कहाँ की मोदी राज में गलत आर्थिक नीतियों के चलते व्यापार संतुलन बिगड़ा है विदेशी मुद्रा भंडार लगातार कम हो रहा है l विदेशी कर्ज 490 अरब डालर से बढ़कर 615 अरब डालर अधिक पहुँच गया है l बेरोजगारी 45 वर्षो के शिखर पर है सी.एम. आई आई के आंकड़ों के मुताबिख 2014 में 3.4 थी और वर्तमान में ऐतिहासिक रुप से सर्वाधिक 8.7 प्रतिशत है।
डा श्रीमति चंद्राकर ने आगे कहा कि देश में अभी लगभग 90 करोड़ लोग नौकरी,योग्य है जिनमे से 45 करोड़ लोगों ने मोदी सरकार की गलत आर्थिक नीतियों की हताशा में नौकरी की तलाश छोड़ दी है l क्रूड आयल की कीमत अंर्तराष्ट्रीय बाज़ार में 2014 की तुलना में कम है लेकिन विगत 8 वर्षों में पेट्रोल की कीमत लगभग 30 रुपये और डीजल की कीमत 40 रुपए लीटर अधिक है जो मोदी सरकार के मुनाफा खोरी का प्रमाण है।
श्रीमति डा चंद्राकर ने आगे कहा कि एक तरफ केंद्र की मोदी सरकार बड़े पूंजीपतियों का लाखो करोड़ का लोन राइट आफ कर रही है वही दूसरी ओर आम जनता को नित नए तुगलकी फैसलों से प्रताड़ित कर रही है।
कपड़ा आटा दाल चावल दूध दही घी पनीर जैसे दैनिक उपभोग की वस्तुओं को जी एस टी के दायरे में लाकर टैक्स वसूल रही है l विगत 8 वर्षों में आटे की कीमत लगभग 48 प्रतिशत चावल 31 प्रतिशत दूध 40 प्रतिशत नमक की कीमत 35 प्रतिशत तक बढ़ गई।

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